“सुनो”, श्रीमतीजी ने फ़रमाया,
“तुम्हारी बहन का whatsapp पे पैगाम है आया”.
बीवी की बात पे श्रीमानजी ने मुँह बिचकाया,
बोले,” क्या जो परसों बोला था, वही है दोहराया?”
श्रीमतीजी की पढ़ते-पढ़ते त्योरियां यूँ चढ़ गयी.
फिर श्रीमतीजी पीछे सोफे पे धम्म से पड़ गयी.
बोली,” बहन जो तुम्हारी है, बातें क्या दोहराएगी.
लिखा है दो-तीन दिन में डाक से चिट्ठी आएगी.
कल वकील से बात करी है, बोला case तुम्हे जिता दूंगा.
बाहर ही फैसला जो करलो, तो दो गज कम में ही निबटा दूंगा”.
सुन कर पैगाम बहन का श्रीमानजी चकरा गए.
सोफे पर बैठते-बैठते भी सर दो चक्कर खा गए.

वहीँ बहन अपने घर मंद-मंद मुस्कुरा रही थी.
अपने whatsapp message  को देख कर इतरा रही थी.
“हुँह. भाई को बात मेरी अब समझ आएगी.
माँ को गए दो महीने हुए, अब बहन वहां नहीं आएगी.
सीधे-साधे से घर में हिस्सा जो दिया होता.
मैं कोई इतनी बुरी नहीं,वकील नहीं किया होता”.
बहन के पति भी बहुत खुश थे, सांस की कोठी बहुत बड़ी है.
अपने खुद के घर से उसमें बस एक बालकनी की कमी है.
बोले,” तुम अड़ी रहना, आधा हिस्सा ले लेंगे.
भाई तुम्हारा बड़ा अमीर है, हम अपना हिस्सा पा लेंगे”.
माँ को गए दो महीने हुए, शोक-वोक अब ख़त्म हो.
पैसों की लेन-देन होकर, बात भी अब दफ़्न हो”.

क्यों भाई-बहन के प्यारे रिश्ते को property खा गयी.
रेशम की डोर के रिश्ते में ये दरार कहाँ से आ गयी.
सदियों से जिस बहन को पराया धन कह नकार दिया.
अठ्ठारह की भी हुई नहीं और शादी कर घर से निकाल दिया.
बहन के मन में लालच और छोड़े जाने का गम है.
भाई के मन की कहानी भी क्या कोई कम है.
माँ-बाप ने बचपन से ‘बहन पराई है’ का ज्ञान दिया.
पढ़ते-लिखते बच्चों को खुद ही अज्ञान किया.
बचपन से जो प्रेमभाव की सीख सिखाई होती.
आज बड़े होने पे रिश्ते में ये दरार ना आयी होती.
राखी की कीमत से ज़्यादा जब पैसों का मोल सिखाये.
बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से खाये.

A relationship is like a tree. Fed with equality, love and care, it gives you very sweet fruits to reap. People need that care and presence of life.

Everybody needs that extra money. What stops them from destroying the relationship for that….is the love. Make the love bonds stronger. The relationship will bloom itself. There is no definition who should get a bigger share of the property. Whoever needs it more…should. Be it the brother or the sister. We forget the importance of love in the materialistic happiness.

So people, build those love bonds. Create equality within your relationship. Do not pity but care for each other. Life is way more important than the menial materialistic one that we make.

Love,
Lipi Gupta

Copyright Lipi Gupta 8/19/2017, 6:46 AM IST

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