शायरी – सुमन गुप्ता

मैने सोचा था जिसे वो ख्वाब हो तुम,

मेरी आँखों में बसी वो शोखी हो तुम।

जो महसूस हो वो खुशबू हो तुम।।

राज़-ए-दिल तुमसे ही छुपाने चले।।

जिनसे दामन झुलसा वो शोला हो तुम।

ना हम समझ सके, ना तुम समझ सके।

जिसने हमें तबाह किया वो कयामत हो तुम।

 

ये खामोशी, ये तन्हाई, ये आंहे,

ये उदासी, ये आंसू, ये चाहें,

ये सदाएं, ये मुरादें, ये दुआएं,

ये सच है तुम्हारे लिए लाएं।

ले लो जो भी तुमने दिया है।

फिर ना कहना कि हमने रख लिया।

 

यूँ दूर जा कर भी भुला ना सकोगे,

वो बातें,

वो वादें,

वो फिर मिलने की ज़िद।

क्या कुछ भी याद नहीं?

वो रातें जो काटीं तारे गिन गिन,

वो दिन जो काटे तेरे इंतेज़ार में,

क्या कुछ भी याद नहीं?

अब जो मिले हो तो ये दूरी क्यों?

वो बिछड़ के फिर से मिलने के वादे।

क्या कुछ भी याद नहीं?

 

 

वो तेरा मुस्कुराना,

वो तेरा सताना,

वो तेरा रूठना,

वो मेरा मनाना,

सब मंज़ूर है मुझे

बस आज तुम मेरे लिए रुक जाओ।

रुक जाओ कि आज,

रुत भी है… फुरसत भी है

…………………………………………………………………………………………………………………………………………………….

सुमन गुप्ता, दिल्ली की रहने वाली, एक माँ, एक पत्नी, एक गायिका हैं। घूमने फिरने की शौकीन, सुमन अपनी लिखने की कला भजन और छोटी कविताएं लिखने में प्रदर्शित करती हैं। वे बहुत कार्यशील एवं प्रतिभाशाली हैं। उनके गीतों को starmaker app पे सुना जा सकता है।

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