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अतीत द्रष्टि

I am a Woman

Random Thought #6: The Rear Window Approach

24 October 2020, 11:33 PM

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HOT COFFEE GOSSIPS

HOT COFFEE GOSSIPS  

अतीत द्रष्टि

  • 53

ये कैसी हवा चली ये क्या तूफां उठा ।     
ये क्या उजड गया जो था दिखायी दिया।।1
किसी के अरमान थे किसी का सम्मन था।
किसी का प्यार था किसी की लाज थी।।2

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Examinations…And True Potential

  • 107

The real potential of yours is not revealed in an exam on an A4 sheet. The true potential is revealed in the practicality of life… On the real battlefield. The true knowledge, the true understanding, relativity, adaptability… These are the real standards of your potential.

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अतीत द्रष्टि

  • 53

ये कैसी हवा चली ये क्या तूफां उठा ।     
ये क्या उजड गया जो था दिखायी दिया।।1
किसी के अरमान थे किसी का सम्मन था।
किसी का प्यार था किसी की लाज थी।।2

Examinations…And True Potential

  • 107

The real potential of yours is not revealed in an exam on an A4 sheet. The true potential is revealed in the practicality of life… On the real battlefield. The true knowledge, the true understanding, relativity, adaptability… These are the real standards of your potential.

बचपन

  • 43

चलो फिर निकलते है
ढूंढने वो जिंदगी के पल
जो खो गए है
इस भाग दौड़ की जिंदगी में।।

बंद खिड़कियों को खोल के

  • 202

बंद खिड़कियों को खोल के,
खुली हवा को आने दो।
सुबह की किरणें झांक सके,
पर्दे किनारे करने दो।

काश जुलाई में!

  • 158

काश जुलाई में!
बूंदों की ही नहीं,
आरोग्य की वर्षा हो।
धान ही नहीं,

चाय वाले दोस्त

  • 270

अदरक, इलायची की खुशबु जैसे,
कभी दालचीनी की मिठास जैसे।
बारिश के मौसम में,
साथ गर्मागर्म पकौड़ों के जैसे।

प्रतीक्षा

  • 262

जीवन पर्यन्त प्रतीक्षा करते हैं,
हम सही समय की।
कभी टूटते, कभी बिखरते,
कभी संभलते;

कहां गए वो दिन,

  • 271

कहां गए वो दिन,
जब डाकिया आया करता था।
तुम ना आए,
तुम्हारे ख़त पहुंचाया करता था।

क्या करोगे हमारा ठिकाना जानकर?

  • 211

हम उन गलियों को
पीछे छोड़ आए हैं।
जहां हमारी मौजूदगी अक्सर,
चेहरों की हंसी गायब कर देती थी।

फ़ुरसत

  • 200
  • 1

फ़ुरसत ही कहां हैं,
हमें आजकल।
अपनों से बात किए,
एक अरसा बीत गया।

आवाज़

  • 207
  • 1

तुम जानते तो हो,
तुम्हारी आवाज़ को सुन लेना।
मानो कोई मधुर संगीत,
कानों में रस घोल रहा हो।

चंद्रमा

  • 600

चंद्रमा कितना अदभुत हैं,
इसकी सुंदरता अविस्मरणीय,
इसकी कलाएं अकल्पनीय।
कभी पूर्ण कभी अर्द्ध 

जरा मैं खुद को संभाल लूं

  • 237

लॉकडॉउन हुआ है,
जरा मैं खुद को संभाल लूं।
दुनियां रुकी हैं, 
जरा मैं खुद को संवार लूं।
आओ जरा खुली हवा में निकले,

ओस की बूदें

  • 358
  • 1

शरद ऋतु के मौसम में,
गिरती वो ओस की बूदें,
मेरे मन को छू जाती हैं।
सर्द रात के गुजर जाने के बाद,

बारिश की वो पहली बूंद

  • 284

रवि किरणों से तप्त धारा पर,
बारिश की वो पहली बूंद।
वो एक बूंद जैसे ही गिरी,
वाष्प बन कर उड़ गई।

The Locked Life

  • 260
  • 1

The horizon is bright every morn 
Yet the mind wakes with a dismal fear

रिश्ते भी एक पहेली हैं

  • 264

रिश्ते भी एक पहेली हैं

कितनी ही कोशिश कर लो

समझने की

समझ आते ही नहीं।

बहुत कम....

  • 425

लोग तो बहुत मिलते है,
लेकिन साथी बहुत कम....

Mother Nature - Sangeeta Roychaudhuri

  • 191

It’s pure it secure its soaked with nature dew
it is touched  Goddess Earth.
To help you figure out that you are not alone 
The entire mother earth is there with you 

समझौता

  • 232

धीरे-धीरे हम ज़िंदगी के साथ
समझौता करके जीना सीख जाते है।
आजादी सबको प्यारी हैं,
बंधन कोई नहीं चाहता हैं।

कभी मिले ही नहीं...

  • 340

न पाया कभी तुम्हारा साथ, किसी मोड़ पर
फ़िर क्यूँ दिखा, तुम ही में सहारा
न थामा कभी तुम्हारा दामन, किसी  राह पर

Someone…

  • 240

It has been a long time,

Since I want to tell you something,

That… you are the only special one I have been looking for.

पारिजात के फूल

  • 308
  • 2

मेरे आंगन में खिलते 
पारिजात के फूल।
अक्टूबर के महीने में 
खिलना शुरु करते।

मेरे सपनों का घर ...

  • 217

मेरे सपनों का घर 
छोटा ही होगा।
दो कमरों और चार दीवारों
खुली खिड़की से सजा होगा।

शायरी – सुमन गुप्ता

  • 297

मैने सोचा था जिसे वो ख्वाब हो तुम,

मेरी आँखों में बसी वो शोखी हो तुम।

जो महसूस हो वो खुशबू हो तुम।।

राज़-ए-दिल तुमसे ही छुपाने चले।।

मेरे ख्वाहिशों की खिड़की

  • 417

मेरे ख्वाहिशों की खिड़की,

आज भी छोटी हैं।

खुली खिड़की से चांद

दिख सके रातों में।

खूबसूरती की याद में…

  • 378

ख़ुदा भी खूबसूरती में कयामत के रंग भर देता है,

रुखसार पर जब एक काला तिल रख देता है।

आँखे वैसे ही कातिलाना हैं उनकी,

वो सुरमे से सजाकर उन्हें कटार कर देता है।।

How You Doin…???

  • 508

Courtesy of Comedy Central, I got to watch the re-re-re-runs of my all-time favorite and a go-to depression-lifter show… F.R.I.E.N.D.S. And yes it was too in an ultramarathon. So from 16-17 March voices that echoed in my house were-

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः

  • 415

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।”

अर्थात जहाँ नारियों की पूजा होती है,ईश्वर वहां निवास करते है।

Dream… by Pooja Rao

  • 461

On a dazzling full moon night,

Awakened by hiccup plight;

Who spared a thought for me?