Tag: hindi poetry

मैने सोचा था जिसे वो ख्वाब हो तुम, मेरी आँखों में बसी वो शोखी हो तुम। जो महसूस हो वो खुशबू हो तुम।। राज़-ए-दिल तुमसे ही छुपाने चले।। जिनसे दामन झुलसा वो शोला हो तुम। ना हम समझ सके, ना तुम समझ सके। जिसने हमें तबाह किया वो कयामत हो तुम।   ये खामोशी, ये […]

Read more

है यकीं मुझे कि मैं कुछ भी नहीं। नन्हा सा कण हूँ अपनी ज़िंदगी का । जब मैं खुद अपनी ज़िंदगी ही नहीं, तो मुझे यकीं है कि मैं कुछ भी नहीं।   यहां हर कण की अहमियत है दुनिया में। खासियतें हैं, ज़रूरतें हैं। चाहतें हैं हर कण की कहीं ना कहीं। पर मैं […]

Read more

भीड़ से भड़क्के से ज़िन्दगी के तेज़ घुमते चक्के से थोड़ा थक चुकी थी मैं. जाने कहाँ जाने की जल्दी थी मुझे किस लिए कदमो को दौड़ाये हाथों को सिमटाए, दिल को सीने में दबाये चले जा रही थी. . मेरा दिल तो धड़कनों की आवाज़ में कह रहा था. “ये जो चलते, भागते, तेज़ […]

Read more

ख़ुदा भी खूबसूरती में कयामत के रंग भर देता है, रुखसार पर जब एक काला तिल रख देता है। आँखे वैसे ही कातिलाना हैं उनकी, वो सुरमे से सजाकर उन्हें कटार कर देता है।। कौन कम्बखत कहता है कि कुदरत में फेरबदल नही होते, वो झरोखें में आए तो खुद ख़ुदा ईद की, तारीखों में […]

Read more

याद है मुझे मेरा हर आँसूं.. हर सिसकी.. तन्हाई में बीता हर लम्हा.. अब आदत सी है तनहा जीने की.. इंतज़ार के घूँट पीने की.. अब तो सच है… तेरे आने का यकीं भी नहीं मुझे.. याद में तेरी शामें भिगोना.. किस्मत सा बन गया है.. तेरे इंतज़ार में जीना.. बस एक ज़रुरत सा बन […]

Read more

  तू साथ तब तक तो देना ऐ ज़िन्दगी की प्यास हर पूरी हो जाए. कहीं पानी छलछला रहा हो आँखों में और प्यास अधूरी ही रह जाए… तू साथ तब तक तो देना ऐ ज़िन्दगी की सांस हर पूरी हो जाए. कहीं खुशबुओं की फुहार हो आसपास और सांस अधूरी ही रह जाए… तू […]

Read more

ज़िन्दगी तू भी एक शिक्षिका है पानी सा अविरल बहने की, पर्वतों सा अडिग खड़े रहने की, धुएं सा ऊंचा बढ़ने की तू प्रेरणा है. क्यूंकि…ज़िन्दगी तू भी एक शिक्षिका है. सिखलाये तू अजब तरीकों से, अलग रास्तों से, अलग सलीकों से. सीखे गर कोई तुझसे तो तू तक्षशिला है. क्यूंकि…ज़िन्दगी तू भी एक शिक्षिका […]

Read more

“सुनो”, श्रीमतीजी ने फ़रमाया, “तुम्हारी बहन का whatsapp पे पैगाम है आया”. बीवी की बात पे श्रीमानजी ने मुँह बिचकाया, बोले,” क्या जो परसों बोला था, वही है दोहराया?” श्रीमतीजी की पढ़ते-पढ़ते त्योरियां यूँ चढ़ गयी. फिर श्रीमतीजी पीछे सोफे पे धम्म से पड़ गयी. बोली,” बहन जो तुम्हारी है, बातें क्या दोहराएगी. लिखा है […]

Read more

पंख तो है पर उन्हें पसार कर, उड़ने से डर लगता है . यूँ तो ज़िन्दगी रुकी नहीं पर, आगे बढ़ने से डर लगता है. राहें है, है मंज़िल भी नज़र में, है अपनी हर कोशिश भी असर में. हिम्मत है पहाड़ नापने की पर, चढ़ने से डर लगता है. ऊंची-नीची लहरें अपनी कोई साथी […]

Read more
Skip to toolbar