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अतीत द्रष्टि

I am a Woman

Random Thought #6: The Rear Window Approach

24 October 2020, 11:55 PM

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मुझे यकीं है कि मैं कुछ भी नहीं

मुझे यकीं है कि मैं कुछ भी नहीं

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है यकीं मुझे कि मैं कुछ भी नहीं।

नन्हा सा कण हूँ अपनी ज़िंदगी का ।

जब मैं खुद अपनी ज़िंदगी ही नहीं,

तो मुझे यकीं है कि मैं कुछ भी नहीं।

 

यहां हर कण की अहमियत है दुनिया में।

खासियतें हैं, ज़रूरतें हैं।

चाहतें हैं हर कण की कहीं ना कहीं।

पर मैं वो कण हूँ जो सिर्फ धूल की तरह,

हवा में दूर तक बहता चला गया।

जिसके अस्तित्व का किसी को पता नहीं।

जो है बस होने के लिए,

और नहीं हुआ तो भी क्या।

जब मेरा होना ज़रूरी ही नहीं,

तो मुझे यकीं है कि मैं कुछ भी नहीं।

 

यूँही इधर उधर भटकता सा रहा।

कभी कभी ज़िन्दगी को पुकारता भी था,

पर सांस लेते लेते बस,

अजनबी हवा में,

हवा के साथ यूँ मैं उड़ता चला गया।

ना हवा के झोंके ने भरोसे का खुलापन ही दिया,

और प्यार से बंधन में बांधा भी कहाँ।

बस एक बोझ सा हवा ने भी तो था लिया।

जब किसी भी बंधन में प्यार से बंधना था ही नहीं,

तो मुझे यकीं है कि मैं कुछ भी नहीं।

जब मैं खुद अपनी ज़िंदगी ही नहीं,

तो मुझे यकीं है कि मैं कुछ भी नहीं।

Love,

Lipi Gupta

Copyright:  Lipi Gupta, 09/12/2018, 18:00 IST

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